धारदार हथियार के वार से हुआ नंदी को घाव, पड़े कीड़े, मदद को आया बजरंग दल और हुआ ये

झाबुआ। जेल बगीचा स्थित बालाजी धाम हनुमान मंदिर के पीछे एक घायल नंदी की पीड़ा ने सबका ध्यान खींचा। समाजसेवी अजय बैरागी ने संवेदनशीलता दिखाते हुए हिंदू संगठन कार्यकर्ताओं को इसकी जानकारी दी। सूचना मिलते ही बजरंग दल झाबुआ के दिलीप भाबोर, जितेंद्र भाबोर, दिव्येश, जितेंद्र बामनिया एवं साथी तुरंत मौके पर पहुंच गए।
सेवाभावी वेटरनरी डॉक्टर रमेश भूरिया को सूचित किया गया, जो तत्परता दिखाते हुए दवाइयों के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। कार्यकर्ताओं ने सावधानीपूर्वक नंदी को काबू में लेकर जमीन पर लेटाया ताकि उसका उपचार किया जा सके। इस दौरान विशेष ध्यान रखा गया कि पशु को किसी प्रकार की और चोट न पहुंचे।
डॉ. भूरिया ने अपने सहयोगी के साथ मिलकर घाव की सफाई की। इस बीच नगर पालिका के नितेश एवं विजय द्वारा नंदी की चमड़ी पर सूख चुके खून को साफ किया गया। उपचार के दौरान डॉक्टर रमेश भूरिया ने पाया कि इलाज ना मिलने से गहरे घाव में कीड़े पड़ चुके थे, और पशु बहुत कष्ट में था। डॉ.भूरिया ने सुझाव दिया कि पशु को समय समय पर उपचार की जरूरत है इसलिए उसे गौशाला भेजा जाना जरूरी है। बजरंग दल कार्यकर्ताओं द्वारा गौशाला में संपर्क किया गया।
नंदी को गौशाला ले जाने के लिए अल्प निवेदन पर नगर पालिका की ओर से बिट्टू सिंगार तुरंत मौके पर पहुंचे और वाहन व्यवस्था सुनिश्चित की। नगर पालिका के पशु वाहन के माध्यम से नंदी को सतगुरु गौशाला पहुंचाया गया, जहां उसे मुक्त किया गया।
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उल्लेखनीय है कि इस सेवा कार्य में 3 घंटों की मेहनत और कई छोटी बड़ी व्यवस्थाएं लगीं। भाग लेने वाले हिंदू संगठन के युवा कार्यकर्ता 12-12 घंटे की नौकरी करते हैं। कुछ तो दो से तीन पार्ट टाइम नौकरी भी करते हैं, लेकिन बावाजूब इसके गौसेवा, धार्मिक व सामाजिक कार्यों में अग्रणी भूमिका निभाते हैं। साथ ही नगर पालिका प्रशासन एवं सफाई कर्मियों की निष्ठा भी अनुमोदनीय है।
यह घटना समाज को एक स्पष्ट संदेश देती है कि अतिव्यस्त रहने के बावजूद यदि मन में करुणा और प्रेम हो तो सेवा के अवसर निभाए जा सकते हैं। गौ सेवा या समाज सेवा की जिम्मेदारी केवल कुछ संगठनों की नहीं, बल्कि हम सभी की है। इन युवाओं ने अपनी जिम्मेदारी को न केवल पहचाना, बल्कि उसे निभाकर एक मिसाल भी पेश की। समाज को चाहिए कि ऐसे संगठनों और कार्यकर्ताओं का सम्मान करे और उनसे प्रेरणा ले।
हिमांशु त्रिवेदी, संपादक, भील भूमि समाचार, Reg.MPHIN/2023/87093