क्या अपराधियों को बचाने का पैसा लेती है झाबुआ पुलिस?
क्या पुलिस अधीक्षक महोदय की जनसुनाई पर हावी है टी आई रमेश भास्करे की मनमर्जी?
👉जब असामाजिक तत्वों के खिलाफ शिकायतकर्ता मौजूद है
👉जब इन्हीं आरोपियों के 3 अलग-अलग अपराधों के 3 अलग-अलग सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध
👉जब 2 बार जन सुनवाई के माध्यम से पुलिस अधीक्षक द्वारा जांच निर्देशन हो चुका
👉जब आरोपी आदतन हैं, जिन पर कथित रूप से पहले से मुकदमे चल रहे हैं
👉जब आरोपी पहले भी एक से अधिक बार पुलिस द्वारा प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के अंतर्गत प्रतिबंधित किया जा चुके हैं
👉 तो फिर गुंडागर्दी पर कार्रवाई क्यों नहीं?
यह लेख केवल अपराधियों को नहीं, बल्कि उन्हें बार-बार बचाने वाली थाना कोतवाली पुलिस को भी बेनकाब करता है।
1. गुंडागर्दी की ताज़ा घटना: बस स्टैंड क्षेत्र, नाश्ता करते युवक को अजीत बेस ने जड़े थप्पड़, खौलते तेल में डालकर तल देने की दी धमकी और कॉलर खींचकर किया डालने ले जाने का प्रयास
👉 सीसीटीवी फुटेज खबर के साथ संलग्न
पूरी घटना दुकान के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई, दुकान मालिक समेत ठेला गाड़ी वाले एवं मौके पर मौजूद अन्य ग्राहक साक्षी बने एवं बीच बचाव किया।
2. गुंडागर्दी की अन्य घटना: अजीत और अभिमन्यु दोनों सगे भाइयों ने राजवाड़ा क्षेत्र में जगन्नाथ यात्रा के बीच किया था विवाद, पूर्व नियोजित योजना बनाकर, घात लगाकर पहले पत्रकार को बकी गली, गाली सुनकर जब पत्रकार ने विरोध किया तो बोले अपशब्द, फिर खोले हाथ।
👉घटना का सीसीटीवी फुटेज संलग्न
दरअसल अभिमन्यु बेस और अजीत बेस वार्ड क्रमांक 6 की निर्दलीय पार्षद के भतीजे हैं। वार्ड के वरिष्ठ नागरिकों को नगर पालिका के माध्यम से दिए गए शासकीय कार्य में बाधा डालने के बेबुनियाद नोटिस को लेकर पत्रकार द्वारा समाचार प्रकाशित किया गया। दोनों भाई इस समाचार से तिलमिलाए हुए थे।
3. हुडदंग की घटना 3: कथित रूप से छोटे भाई अभिमन्यु उर्फ हर्षित बेस व साथियों ने कुछ ही समय पूर्व राजवाड़ा चौक, दीपावली के बाद मचाया था उपद्रव
👉सीसीटीवी फुटेज संलग्न
दीपावली के अगले दिन, गुड़ी पड़वा के दिन, राजवाड़ा क्षेत्र में—
👉आम जनता पर,
👉व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर
👉और तो और मंदिरों के अंदर भी
पटाखे और बम बरसाए गए, आसमान में चलाए जाने वाले स्काई शॉट रॉकेट लांचर की तरह जमीन पर दागे गए, क्षेत्र में दहशत मच गई। व्यापारियों और नागरिकों ने घटना की घोर निन्दा की।
गौरतलब है कि आने वाले समय में जब इनकी देखा देखी नगर एवं ग्रामीण के अन्य युवा करेंगे और नगर में बम पटाखों से उपद्रव करना सीखेंगे तब क्या उन्हें दोषी ठहराना सही होगा?
👉सबसे पहले दोषी होंगे यही लोग जिन्होंने “पहल” की और “उदाहरण” प्रस्तुत किया
👉और इनसे ज्यादा दोष पुलिस का जिसने सीसीटीवी उपलब्ध होने बावजूद कार्यवाही नहीं की।
आखिर टीआई रमेश भास्कर पर ऐसा कौन सा दबाव है जो वे लगातार इन अपराधियों को संरक्षण दे रहे हैं?
पुलिस की लीपापोती मिलेगी देखने: वर्तमान गुंडागर्दी की घटना में:
👉पुलिस मार खाने वाले युवक को बुलाएगी,
👉उसे फरियादी बनने को कहेगी,
👉लेकिन — गुंडों के डर से, लगातार धमकी और मानसिक दबाव में,
👉”वह व्यक्ति शिकायत करने आगे नहीं आएगा।”
👉और फिर पुलिस कह देगी —
“फरियादी आया ही नहीं, केस खत्म।”
जबकि —
👉इन गुंडों ने जिसके साथ पहले अपराध किए हैं वे फरियादी आज तक थाने और पुलिस अधीक्षक कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन टी आई साहब द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही।
👉ज्यादा से ज्यादा आवेदन लेकर एनसीआर या अदमचेक लिख कर फरियादी को रवाना कर दिया जाएगा!
पुलिस अधीक्षक महोदय, “पुलिस की निष्क्रियता असामाजिक तत्वों की सबसे बड़ी ढाल बन चुकी है।”
हिमांशु त्रिवेदी, संपादक, भील भूमि समाचार, Reg.MPHIN/2023/87093



